कई कंपनियों के सीईओ और वरिष्ठ अधिकारी अब कर्मचारियों के सवालों के जवाब देने के लिए एआई एजेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि किसी अधिकारी के पास समय नहीं है तो कर्मचारी उसके एआई क्लोन से बातचीत कर सकते हैं। स्टेबलकॉइन कंपनी सर्किल के सीईओ जेरेमी अलेयर ने अपने पॉडकास्ट इंटरव्यू, लेखों और आंतरिक बातचीत के आधार पर एक एआई एजेंट तैयार किया है। यह एजेंट उनकी तरह सोचता और लिखता है। अलेयर इसे जेरेमी अलेयर स्किल''कहते हैं। शुरुआत में यह दस्तावेजों के मसौदे तैयार करने में मदद करता था, लेकिन वे उससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कंपनी के एक हजार से अधिक कर्मचारियों से बातचीत करने की जिम्मेदारी उसे सौंप दी है। कंसल्टेंट और एग्जीक्यूटिव कोच अपने कुछ क्लाइंट्स को एआई जुड़वां के पास भेज रहे हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के कुछ प्रोफेसरों ने अपने एआई संस्करणों को सिलेबस और आफिशियल कामों में शामिल कर लिया है। कई कंपनियां दूसरे देशों के कर्मचारियों को उनकी भाषा में संबोधित करने के लिए एआई अवतारों का उपयोग कर रही हैं। डेल्फी, हेजेन और सिंथेसिया जैसे स्टार्टअप किसी व्यक्ति के कंटेंट, आवाज और शैली के आधार पर उसके डिजिटल संस्करण बना रहे हैं। पिछले साल करीब 150 करोड़ रुपए की फंडिंग जुटाने वाली डेल्फी के सीईओ दारालेदजेवर्दियन के अनुसार यह किसी व्यक्ति के दिमाग की नई तरह की डिजिटल कलाकृति है। कुछ नई कंपनियां क्लोनिंग की इस विशेषज्ञता में मुनाफा देख रही हैं। एक अन्य स्टार्टअप सेंसे कंपनी छोड़ने वाले कर्मचारियों के एआई वर्जन बनाकर उनके ज्ञान का उपयोग कर रही है। प्रोडक्ट मैनेजमेंट पर चर्चित पॉडकास्ट चलाने वाले लेनी रैचिट्स्की का एआई चैटबॉट लेनीबॉट'' रोजाना करीब 100 बार बातचीत करता है। वहीं आईएचएल ग्रुप के प्रेसिडेंट ग्रेग बुजेक ने जनवरी में आस्क ग्रेग एआई'' लॉन्च किया, जो 30 डॉलर मासिक शुल्क पर रिसर्च से जुड़े सवालों के जवाब देता है। हालांकि कई अधिकारियों का अनुभव है कि लोग कई बार सीधे व्यक्ति से बातचीत करना पसंद करते हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में भी उपयोग हो रहा अप्रैल में लॉन्च फाउंड्री नामक ऑनलाइन कैम्प में प्रोफेसरों के चैट और वीडियो अवतारों का इस्तेमाल कर रहा है। छात्र, कस्टमर और वेंचर कैपिटलिस्ट से भी एआई वीडियो अवतारों के द्वारा संवाद करा सकते हैं।एआई अवतार अपनी विशेषज्ञता और हार्वर्ड की रिसर्च के आधार पर सलाह देते हैं।
एआई को लेकर अब तक सवाल था कि वह इंसानों का काम कितनी तेजी से कर सकता है। लेकिन अब चिंता इससे आगे की है। विशेषज्ञ पूछ रहे हैं- अगर एआई अगली पीढ़ी के मॉडल खुद बनाने लगे तो क्या इंसान उसे नियंत्रित कर पाएंगे? हाल में एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने कहा था कि फ्रंटियर एआई डेवलपमेंट धीमा करने या अस्थायी रूप से रोकने का विकल्प होना चाहिए। कंपनी के अनुसार, मई 2026 में प्रकाशित कोड का 80% से ज्यादा हिस्सा एआई ने लिखा था। एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक जैक क्लार्क का अनुमान है कि 2028 तक ऐसा सिस्टम संभव है, जो इंसानी मदद के बिना अपना नया संस्करण तैयार कर सके। इसे रिकर्सिव सेल्फ इम्प्रूवमेंट कहते हैं। यानी एआई का एक मॉडल दूसरे को बनाए, दूसरा तीसरे को और तीसरा चौथे को। हर मॉडल पहले से ज्यादा सक्षम हो। एमआईटी के भौतिक विज्ञानी और एआई सुरक्षा विशेषज्ञ मैक्स टेगमार्क चेताते हैं कि यदि विकास की रफ्तार पर निगरानी नहीं रही तो एआई निर्णय लेने में इंसानों से आगे निकल जाएगा। ऐसे में सरकारों, कंपनियों और अहम संस्थानों में इंसानी भूमिका कमजोर हो सकती है। कुछ साल पहले तक एआई सिर्फ निर्देश मानता था। अब समाधान खोज रहा है। गूगल डीपमाइंड के एआई सिस्टम अल्फा इवॉल्व ने डेटा सेंटरों की कार्यप्रणाली सुधारने और एआई ट्रेनिंग तेज करने के तरीके सुझाए। यही वजह है कि वैज्ञानिकों का एक वर्ग मानता है कि इंसान शोधकर्ता के बजाय रिसर्च डायरेक्टर रह जाएंगे। वे सिर्फ दिशा देंगे। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ये बदलाव रातोरात नहीं होगा। एआई को अब भी डेटा सेंटर, महंगे चिप्स, बिजली और नई ट्रेनिंग सामग्री की जरूरत है। उसकी गति फिलहाल सीमित रहेगी। अभी एआई उत्तराधिकारी नहीं बनाता, पर ट्रेनिंग तेज कर रहा अभी कोई एआई मॉडल अपना उत्तराधिकारी पूरी तरह खुद नहीं बना सकता। पर बड़े मॉडल छोटे मॉडल खुद बना सकते हैं। ओपनएआई के पूर्व शोधकर्ता आंद्रेज कारपैथी ने जीपीटी-2 जितना सक्षम चैटबॉट प्रशिक्षित किया। जीपीटी-2 को ओपनएआई ने 2019 में बनाया था। तब 168 घंटे लगे थे। कारपैथी ने एक कंप्यूटर में 8 जीपीयू के साथ वही नतीजा 3 घंटे में हासिल किया। बाद में ये काम एआई एजेंट को दे दिया। उसने इसे 18% और कम कर दिया।
मई महीने में देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने बिक्री का एक नया रिकॉर्ड बनाया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, मई 2026 में देश की कुल ऑटो रिटेल सेल्स 9.55% बढ़कर 25,31,067 यूनिट पर पहुंच गई। पिछले साल मई में यह आंकड़ा 23,10,451 यूनिट था। इस रिकॉर्ड बिक्री के बीच सबसे बड़ी बात यह रही कि देश में पहली बार कुल बिकने वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की हिस्सेदारी 11% के पार निकल गई है। मिडल ईस्ट संकट के कारण पिछले दिनों देश में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसकी वजह से ग्राहकों का रुझान ग्रीन और फ्यूल-एफिशिएंट वाहनों की तरफ बढ़ा है। मई में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 23.25% बढ़ी FADA के आंकड़ों के अनुसार, मई के महीने में पैसेंजर व्हीकल्स (कार) की रिटेल बिक्री 23.25% की भारी बढ़त के साथ रिकॉर्ड 4,02,591 यूनिट रही। पिछले साल मई 2025 में यह आंकड़ा 3,26,656 यूनिट था। इसके अलावा टू-व्हीलर्स (दोपहिया वाहनों) की बिक्री भी 7.54% बढ़कर 18,44,947 यूनिट रही। दोपहिया वाहनों में EV का शेयर 9% के करीब पहुंचा मई में ईंधन की कीमतों में हुए बदलाव का असर ग्राहकों की पूछताछ पर साफ देखा गया। डीलर्स का कहना है कि लोग अब ज्यादा माइलेज देने वाले और वैकल्पिक ईंधन (जैसे EV और हाइब्रिड) वाले वाहनों के बारे में ज्यादा पूछ रहे हैं। यही वजह है कि दोपहिया वाहनों के बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का शेयर एक साल पहले के 6.11% से बढ़कर अब 9.25% पर पहुंच गया है। कमर्शियल और थ्री-व्हीलर सेगमेंट का प्रदर्शन थ्री-व्हीलर्स की बिक्री पिछले महीने 3.56% बढ़कर 1,11,526 यूनिट रही, जो पिछले साल मई में 1,07,688 यूनिट थी। वहीं, कमर्शियल व्हीकल्स (CV) यानी भारी वाहनों के सेगमेंट में भी 5.29% की ग्रोथ देखी गई और यह रिकॉर्ड 83,823 यूनिट पर पहुंच गया। हालांकि, पिछले साल के ऊंचे बेस के कारण कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (पहियों वाले निर्माण उपकरण) की बिक्री में 17.51% की गिरावट आई है।
एपल का एनुअल इवेंट वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस 2026 एपल पार्क में शुरू हो गया है। इस बार इवेंट में सिरी, iOS 27 और एपल इंटेलिजेंस को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए हैं। सबसे खास सिरी को नए अवतार में 'सिरी AI' नाम से पेश किया गया, जो पहले से कहीं ज्यादा बातचीत करने में सक्षम और कॉन्टेक्स्ट-अवेयर (यानी संदर्भ को समझने वाला) है। सिरी AI बिना एप बदले ईमेल और मैसेज लिख सकेगी और फोटो देखकर बताएगी खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू भी बताएगी। साल 2011 में आईफोन पर डेब्यू के बाद से यह सिरी का अब तक का सबसे बड़ा अपग्रेड है, जिसके जरिए कंपनी चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लाउड जैसे प्रतिस्पर्धियों को टक्कर देने की तैयारी कर रही है। आगे जानिए एपल ने WWDC 2026 में iOS 27 में क्या नए अपडेट्स किए हैं। 1. सिरी में बड़ा बदलाव: गूगल जेमिनी के साथ अब नए स्टैंडअलोन एप में मिलेगी एपल ने अपनी पुरानी सिरी असिस्टेंट को AI के इस दौर में ज्यादा एडवांस बना दिया है। नए अपडेट के बाद सिरी अब गूगल जेमिनी मॉडल की मदद से काम करेगी। कंपनी का दावा है कि नई सिरी पहले से ज्यादा बातचीत करने लायक, विजुअल इंटेलिजेंस को समझने वाली और ज्यादा क्षमतावान होगी। अब सिरी को मौजूदा एप्स के साथ-साथ एक अलग स्टैंडअलोन एप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। 2. AI प्राइवेसी पर फोकस: डेटा सिर्फ रिक्वेस्ट पूरी करने के लिए होगा AI फीचर्स को रोलआउट करने से पहले एपल ने प्राइवेसी को लेकर अपना स्टैंड साफ किया है। एपल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट क्रेग फेडरिघी ने कहा, हम मानते हैं कि एआई में प्राइवेसी के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने भरोसा दिया कि यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल केवल उनकी रिक्वेस्ट को पूरा करने के लिए किया जाएगा और बाहरी एक्सपर्ट्स कभी भी इस वादे की जांच कर सकते हैं। 3. एपल इंटेलिजेंस: कॉलिंग के दौरान मेल और मैसेज का संदर्भ समझेगा फोन कंपनी ने अपने एप्स में कई नए एपल इंटेलिजेंस अपडेट शामिल किए हैं। सफारी ब्राउजर के लिए अब टैब मैनेजमेंट और वन-टैप पासवर्ड अपडेट की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, एप्स के बीच क्रॉस-एप कॉन्टेक्स्ट अवेयरनेस (एक एप की बात दूसरे में समझना) फीचर दिया गया है। मैसेज एप में अब AI-पावर्ड रिप्लाई सजेशन मिलेंगे, जबकि फोन एप अब कॉल के दौरान ही मेल और मैसेज जैसे अन्य एप्स से संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) निकाल सकेगा। एपल ने बताया कि इन फीचर्स के लिए उन्होंने गूगल के जेमिनी मॉडल्स की मदद से एपल फाउंडेशन मॉडल्स तैयार किए हैं। 4. iOS 27: आईफोन 11 और उसके बाद के सभी मॉडल्स को मिलेगा सपोर्ट एपल ने दावा किया है कि यह उनका अब तक का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर अपडेट होगा जो सबसे ज्यादा डिवाइसेज को सपोर्ट करेगा। कंपनी ने ऐलान किया कि आईफोन 11 और उसके बाद के सभी आईफोन मॉडल्स को iOS 27 का अपडेट मिलेगा। इस नए अपडेट से परफॉर्मेंस काफी बेहतर हो जाएगी। एपल के मुताबिक, नए फोटो अब 70% ज्यादा तेजी से दिखाई देंगे, एयरड्रॉप ट्रांसफर की स्पीड 80% बढ़ जाएगी और मल्टीटास्किंग को बेहतर करने के लिए सीपीयू शेड्यूलर्स में सुधार किया गया है। 5. पेरेंटल कंट्रोल्स: 13 साल से छोटे बच्चों के लिए 'आस्क टू ब्राउज' डिफॉल्ट रहेगा बच्चों के स्क्रीन टाइम और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एपल ने माता-पिता के लिए नए टूल्स पेश किए हैं। अब पेरेंट्स यह तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा किसे कॉल कर सकता है और किन एप्स या वेबसाइट्स को एक्सेस कर सकता है। 13 साल से कम उम्र के बच्चों की डिवाइसेज में 'आस्क टू ब्राउज' (वेबसाइट एक्सेस लिमिट) और एप स्टोर या इन-एप परचेज के लिए 'आस्क टू बाय' फीचर बाय-डिफॉल्ट एक्टिव रहेगा। 6. फोटो एप में AI एडिटिंग: रीफ्रेम और एक्सटेंड टूल्स से बदल जाएगा तस्वीर का लुक फोटो एडिटिंग एप्स को टक्कर देने के लिए एपल फोटो एप में नए एआई टूल्स लाया है। नया स्पेशल 'रीफ्रेम' फीचर एआई की मदद से फोटो के पर्सपेक्टिव (एंगल) को ऐसे बदल देगा जैसे तस्वीर लेते वक्त कैमरा किसी दूसरी जगह रखा हो। वहीं 'एक्सटेंड' टूल इमेज के आस्पेक्ट रेशियो को बढ़ा देगा जिससे सीन में और ज्यादा चीजें जोड़ी जा सकेंगी। इसके अलावा 'क्लीनअप' टूल को भी अपग्रेड किया गया है, जो जेनरेटिव एआई की मदद से फोटो के बैकग्राउंड से अनचाही चीजों को ज्यादा रियलिस्टिक तरीके से हटा देगा। 7. लिक्विड ग्लास डिजाइन और इमेज प्लेग्राउंड में बदलाव पिछले साल के लिक्विड ग्लास डिजाइन को पसंद न करने वाले यूजर्स के लिए एपल ने इसमें कुछ बदलाव करने (ऑप्ट-इन रोलबैक) का विकल्प दिया है। अब यूजर्स इसके एलिमेंट्स को कम या ज्यादा हाइलाइट कर सकते हैं। इसके साथ ही एप्स के अंदर लिक्विड ग्लास का एक नया लेयर्ड अप्रोच दिखाया गया है। वहीं, इमेज जनरेशन एप 'इमेज प्लेग्राउंड' को परफॉर्मेंस अपडेट के साथ दोबारा पेश किया गया है। इसमें सुरक्षा रखी गई है कि इस एप से बनी तस्वीरों का इस्तेमाल एआई की ट्रेनिंग के लिए नहीं किया जाएगा। 8. नए फीचर्स: कीबोर्ड में इन-बिल्ट एआई डिक्टेशन और शॉर्टकट्स में नेचुरल लैंग्वेज 9. टिम कुक: 'मुझे भरोसा है कि एपल का सबसे बेहतरीन समय अभी आना बाकी है' कीनोट के आखिर में CEO टिम कुक ने कंपनी को अलविदा कहते हुए अपना आखिरी मैसेज दिया। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ सालों में आपने लोगों को असाधारण तरीकों से जुड़ने, सीखने और अनुभव करने में मदद की है। आज जिन शानदार क्षमताओं को हमने पेश किया है और जो आगे आने वाली हैं, उन्हें देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि एपल का सबसे बेहतरीन समय अभी आना बाकी है। लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाना हमेशा हमारा ध्रुवतारा रहा है। ऐसी क्रिएटिव और केयरिंग टीम के साथ इस मिशन को आगे बढ़ाना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।”
एक समय था जब लोगों, खासकर युवा पीढ़ी के बीच डिजिटल साधनों और सोशल मीडिया अपनाने की होड़ थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। डिजिटल साधनों, ज्यादा स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन रहने से लोगों के बीच डिजिटल थकान बढ़ने लगी है। भारत-अमेरिका सहित कई देशों में हुए अलग-अलग सर्वे के मुताबिक नई पीढ़ी लगातार नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया और डिजिटल थकान से बचने के लिए ‘डिजिटल मिनिमलिज्म’ को अपना रही है। कुछ लोग विनाइल रिकॉर्ड, सीडी और रिकॉर्ड प्लेयर खरीद रहे हैं। कुछ लोग 2000 के दशक की पुरानी चीज माने जाने वाले फ्लिप फोन या कीपैड वाले फीचर फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बॉलीवुड और हॉलीवुड के सेलेब्स समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स लेते रहते हैं। कुछ सेलेब्स ने सोशल मीडिया अकाउंट तक छोड़ दिए हैं। कई देशों की सरकारों ने छात्रों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करने के नियम बनाए हैं। भारत में भी ऐसी पहल हो रही हैं। कर्नाटक ने छात्रों के लिए मनोरंजन संबंधी स्क्रीन टाइम प्रतिदिन एक घंटे तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं चंडीगढ़ में संडे अनप्लग टू रिकनेक्ट अभियान शुरू किया गया है। महत्वपूर्ण पलों में डिजिटल साधनों से दूरी परिवारों को जोड़ने में कारगर - 91% बच्चों के मुताबिक फोन दूर रखे जाते हैं तो परिवार की आपसी बातचीत आसान हो जाती है। - 87% बच्चे फोन -फ्री डिनर के दौरान खुलकर बात करने में अधिक सहज महसूस करते हैं - 81% माता-पिता कहते हैं कि बिना फोन के बच्चों के साथ उनका रिश्ता ज्यादा मजबूत महसूस होता है। - 47% माता-पिता और 30% बच्चे साधारण फोन अपना रहे। - 54% माता-पिता और 49% बच्चे स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश कर रहे। - 51% माता-पिता और 41% बच्चे कुछ घंटों के लिए सोशल मीडिया ब्लॉक करते हैं। - 49% माता-पिता और 50% बच्चे गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद कर रहे। - 59%- माता-पिता और 47% बच्चों ने कहा कि डिजिटल व्यवहार पर ज्यादा नियंत्रण हुआ। वीवो-सीएमआर स्विच ऑफ स्टडी 2025 - वीवो इंडिया और सीएमआर द्वारा हर साल किए जाने वाले स्विच ऑफ अध्ययन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक लोग डिजिटल साधनों से दूरी बनाने लगे हैं। वीवो इंडिया के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन अधिकारी, गीताज चन्नाना कहते हैं, ‘स्विच ऑफ अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि परिवार महत्वपूर्ण क्षणों में डिजिटल डिस्कनेक्ट का विकल्प चुन रहे हैं।’ बिना फोन-मोबाइल वाले पर्यटन का उभार ट्रैवल इंडस्ट्री में ऑफ-ग्रिड ट्रैवल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पोलारिस मार्केट रिसर्च के मुताबिक डिजिटल डिटॉक्स हॉलिडे का वैश्विक बाजार 6 लाख करोड़ रु. से ज्यादा का है। ये 2034 तक 24.5% सालाना बढ़कर करीब 44 लाख करोड़ का हो सकता है। ट्रैवल ई-सिम एप सेली के सर्वे में एक चौथाई वयस्क अब बिना फोन या इंटरनेट के यात्रा करना पसंद कर रहे। व्यवसाय के नए अवसर देख रहीं कंपनियां डिजिटल डिटॉक्स एक नई लाइफस्टाइल और बड़ा व्यावसायिक अवसर बनकर उभर रहा है। डंब.को, डंबफोन्स इंडिया और किकबैक जैसी कंपनियां इसी मांग पर आधारित बिजनेस बना रहे हैं। ये पुराने सीडी प्लेयर और फीचर फोन्स बेच रही हैं। इन फोन में कॉल, मैसेज, वाट्सएप्स, यूपीआई और मैप जैसी सुविधाएं होती हैं, लेकिन सोशल मीडिया नहीं होता। उद्योग समूह भी आयोजित करवा रहे डिजिटल डिटॉक्स रिट्रीट डिटॉक्स ट्रैवल उपलब्ध कराने वाली बेंगलुरु की फर्म ट्रांसफॉर्मिंग ट्रैवल्स की फाउंडर चांदनी अग्रवाल बताती हैं, ‘हमें कॉर्पोरेट समूहों से अपनी टीमों के लिए डिजिटल डिटॉक्स रिट्रीट आयोजित करने की मांग मिलती है। इसमें लोग अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप और सोशल मीडिया से दूरी बनाते हैं। रिट्रीट में भाग लेने वाले अधिकांश लोग 30 से 60 आयु वर्ग के होते हैं। इनमें करीब 70-80% महिलाएं होती हैं। 90% ग्राहक लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और स्पीति घाटी जैसे क्षेत्रों में रिट्रीट आयोजित करना पसंद करते हैं।’
टेक कंपनी शाओमी ने भारत में अपना नया प्रीमियम स्मार्टफोन शाओमी 17T और शाओमी FX मिनी LED TV लॉन्च की हैं। स्मार्टफोन 120x जूम के साथ 50MP लाइका कैमरा, 6500mAh बैटरी और फ्लैगशिप लेवल फीचर्स के साथ आया है। कंपनी ने इस फोन को खासतौर पर उन यूजर्स के लिए पेश किया है जो प्रीमियम डिजाइन, पावरफुल परफॉरमेंस और हाई-एंड कैमरा एक्सपीरियंस चाहते हैं। शाओमी 17T को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसके 12GB रैम + 256GB स्टोरेज वाले शुरुआती वैरिएंट की कीमत 59,999 रखी गई है, लेकिन लॉन्च ऑफर में ₹5000 के डिस्काउंट के बाद इसे 54,999 रुपए में खरीदा जा सकता है। भारत में इसका मुकाबला वनप्लस 15R और वीवो V70 जैसे स्मार्टफोन्स से होगा। वहीं, शाओमी FX मिनी LED TV को 4 वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 32,999 रुपए रखी गई। लॉन्च ऑफर में फिलहाल इसे 29,999 रुपए में खरीदा जा सकता है। फोन की सेल 10 जून और TV की सेल 11 जून से शुरू होगी। शाओमी 17T: डिजाइन, डायमेंशन और इन-हैंड फील मटेरियल और टेक्स्चर: फोन का बैक पैनल और साइड फ्रेम प्रीमियम फिनिश वाले प्लास्टिक मटेरियल से बना है, जो हाथ में पकड़ने पर बिल्कुल ग्लास (कांच) जैसा स्मूथ फील देता है। इसका लुक काफी सिंपल और मिनिमलिस्टिक है। डायमेंशन और वजन: फोन सिर्फ 8.17mm पतला है और इसका वजन करीब 201.8 ग्राम है। हालांकि, स्लिम डिजाइन और वेट डिस्ट्रिब्यूशन की वजह से यह हाथ में काफी हल्का, छोटा और कॉम्पैक्ट लगता है। फोन 3 कलर ऑप्शन वॉयलेट, ब्लू और ब्लैक में मिलेगा। पोर्ट्स और बटन्स: फोन के नीचे की तरफ (बॉटम) एक स्पीकर ग्रिल, USB टाइप-C पोर्ट, माइक्रोफोन और एक डुअल नैनो सिम ट्रे दी गई है। फोन का लेफ्ट साइड पूरी तरह से क्लीन है। इसके राइट साइड पर परफेक्ट पोजीशन में पावर बटन और उसके ठीक ऊपर वॉल्यूम रॉकर बटन्स दिए गए हैं। खास बात यह है कि इसके टॉप (ऊपर) पर कोई भी पोर्ट या विजिबल होल नहीं है, लेकिन यह IR ब्लास्टर को सपोर्ट करता है। फ्रंट डिस्प्ले और सेफ्टी: फ्रंट में बेजल्स काफी पतले हैं, जिससे स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो अच्छा मिलता है। पंच-होल डिजाइन के साथ सेल्फी कैमरा सेंटर में है। पानी और धूल से सुरक्षा के लिए इसे IP68 की टॉप रेटिंग मिली है। शाओमी 17T: स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स डिस्प्ले: शाओमी 17T में 6.59-इंच का 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रिजॉल्यूशन 2756 x 1268 पिक्सल है। यह 120Hz रिफ्रेश रेट और 480Hz टच सैंपलिंग रेट को सपोर्ट करता है। इसकी पीक ब्राइटनेस 3500 निट्स है, यानी तेज धूप में भी विजिबिलिटी में कोई दिक्कत नहीं होगी। डिस्प्ले की सुरक्षा के लिए इस पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i की प्रोटेक्शन मिलती है। इसके अलावा यह डॉल्बी विजन और HDR10+ सपोर्ट के साथ आता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इस फोन में कैमरा कंपनी 'लाइका' के ऑप्टिकल लेंस वाला ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है। इसमें OIS सपोर्ट के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा (लाइट फ्यूजन 800 सेंसर), 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा और 12MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा शामिल है। कैमरा एप में लाइका ऑथेंटिक और लाइका वाइब्रेंट जैसे मोड्स के साथ 120x AI जूम का सपोर्ट मिलता है। सेल्फी के लिए फ्रंट में 32MP का कैमरा दिया गया है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: स्मार्टफोन 4nm आर्किटेक्चर पर बने मीडियाटेक डायेमेंसिटी 8500-अल्ट्रा प्रोसेसर पर काम करता है। ग्राफिक्स के लिए इसमें माली-G720 MC8 GPU और AI टास्क के लिए NPU 880 AI इंजन दिया गया है। फोन में LPDDR5X रैम और UFS 4.1 स्टोरेज तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। हीटिंग से बचाने के लिए इसमें शाओमी का 3D आइसलूप कूलिंग सिस्टम लगा है। यह फोन लेटेस्ट एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड शाओमी हाइपर OS 3 पर चलता है, जिसमें कई इन-बिल्ट AI फीचर्स जैसे AI राइटिंग, सर्कल टू सर्च और गूगल जेमिनी का सपोर्ट मिलता है। पावर बैकअप: फोन में 6500mAh की बड़ी सिलिकॉन-कार्बन बैटरी दी गई है, जो लंबे समय का प्लेबैक टाइम और बैकअप देती है। यह 67W हाइपरचार्ज फास्ट चार्जिंग, 50W चार्जिंग और 22.5W वायर्ड रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करता है। हालांकि, कंपनी बॉक्स में एडॉप्टर साथ नहीं दे रही है, बॉक्स में केवल टाइप-A टू टाइप-C केबल मिलेगी। कनेक्टिविटी व अन्य: इस फोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर और एआई फेस अनलॉक दिया गया है। ऑडियो के लिए डॉल्बी एटमॉस सपोर्ट वाले डुअल स्टीरियो स्पीकर्स मिलते हैं। कनेक्टिविटी के मोर्चे पर यह वाई-फाई 6E, ब्लूटूथ 6.0, NFC और फिजिकल सिम के साथ eSIM सपोर्ट से लैस है। इसमें पारंपरिक 3.5mm का ऑडियो जैक नहीं मिलता है। शाओमी TV FX मिनी LED सीरीज: डिजाइन और कनेक्टिविटी शाओमी TV FX मिनी LED सीरीज 43 इंच से लेकर 75 इंच तक के 4 वैरिएंट में अवेलेबल है। यह सीरीज शानदार पिक्चर क्वालिटी के लिए क्यूडी (QD) मिनी LED डिस्प्ले टेक्नोलॉजी और बेहतर स्मार्ट फीचर्स के लिए फायर TV इंटीग्रेशन के साथ आती है। इस सीरीज को ब्लैक फिनिश के साथ मेटल बेजल-लेस डिजाइन दिया गया है। इसका स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो काफी ज्यादा है; 43-इंच और 55-इंच मॉडल्स में 97% और 65-इंच व 75-इंच मॉडल्स में 98% स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो मिलता है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें डुअल-बैंड वाई-फाई और ब्लूटूथ दिया गया है। इसके अलावा तीन HDMI पोर्ट्स (एक eARC सपोर्ट के साथ), दो USB 2.0 पोर्ट्स, एक ईथरनेट पोर्ट, एक AV इनपुट, एक ऑप्टिकल ऑडियो पोर्ट, एक हेडफोन जैक और एंटीना कनेक्टर्स दिए गए हैं। शाओमी TV FX मिनी LED सीरीज: डायमेंशन और वजन शाओमी TV FX मिनी LED सीरीज: स्पेसिफिकेशंस 4K अल्ट्रा HD डिस्प्ले और 1.07 अरब कलर्स का सपोर्टइस सीरीज के सभी मॉडल्स में 4K (3,8402,160 पिक्सल) अल्ट्रा HD डिस्प्ले दिया गया है, जिसका व्यूइंग एंगल 178 डिग्री तक है। बेहतर कंट्रास्ट और ब्राइटनेस कंट्रोल के लिए इसमें फुल एरे लोकल डिमिंग और मिनी LED बैकलाइटिंग के साथ क्यूडी मिनी LED टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है। यह टीवी सीरीज HDR10, HDR10+ फॉर्मेट, फिल्ममेकर मोड और शाओमी के विविड पिक्चर इंजन 2 को सपोर्ट करती है। यह DCI-P3 कलर गैमट का 93% कवर करती है और 1.07 अरब कलर्स डिस्प्ले कर सकती है। स्क्रीन साइज के हिसाब से टीवी में 104 तक लोकल डिमिंग जोन्स दिए गए हैं। बड़े मॉडल्स में 120Hz रिफ्रेश रेट और दमदार प्रोसेसरस्क्रीन रिफ्रेश रेट की बात करें तो 43-इंच वैरिएंट 60Hz पर काम करता है, जबकि 55-इंच, 65-इंच और 75-इंच मॉडल्स DLG 120Hz गेम मोड को सपोर्ट करते हैं। पूरी सीरीज में MEMC टेक्नोलॉजी, ऑटो लो लेटेंसी मोड और आई केयर मोड दिया गया है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें क्वाड-कोर कॉर्टेक्स-A55 प्रोसेसर के साथ माली-G52 2EE MC1 GPU दिया गया है। इसमें 2GB रैम और 32GB की इनबिल्ट स्टोरेज मिलती है। फायर टीवी OS और अलेक्सा वॉयस कमांड्सशाओमी की यह TV सीरीज फायर टीवी पर चलती है, जिससे यूजर्स को 12,000 से ज्यादा एप्स का एक्सेस मिलता है। सॉफ्टवेयर फीचर्स के तौर पर इसमें यूजर प्रोफाइल्स, पैरेंटल कंट्रोल्स, एपल एयरप्ले 2 सपोर्ट, इन-बिल्ट एलेक्सा वॉयस असिस्टेंट इंटीग्रेशन, क्विक वेक फंक्शनलिटी और एक डेडिकेटेड क्विक सेटिंग्स मेनू शामिल हैं। डॉल्बी ऑडियो के साथ मिलेगा थिएटर जैसा साउंडऑडियो के लिए 43-इंच वेरिएंट में 20W का टू-स्पीकर सिस्टम दिया गया है। वहीं, इसके 55-इंच, 65-इंच और 75-इंच मॉडल्स में फोर-ड्राइवर सेटअप मिलता है, जिसमें दो फुल-रेंज स्पीकर्स और दो हाई-फ्रीक्वेंसी ड्राइवर्स शामिल हैं। साउंड क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए यह सीरीज डॉल्बी ऑडियो, DTS:X और DTS वर्चुअल:X ऑडियो टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करती है।
आज लगभग हर बजट और हर जरूरत के लिए एक अच्छा फोन बाजार में उपलब्ध है। लेकिन अगर आप अपनी जरूरत के हिसाब से सबसे बेहतरीन स्मार्टफोन चाहते हैं और किसी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं, तो इस साल कुछ ऐसे स्मार्टफोन आने वाले हैं, जिनका इंतजार करना फायदेमंद हो सकता है। जुलाई और सितंबर में गूगल-एपल के नए फोन भी आने वाले हैं। कैमरा फोन से लेकर गेमिंग तक, यह 6 स्मार्टफोन होंगे दिलचस्प पिक्सल 11 सीरीज, फोटोग्राफी के लिए पिक्सल 11 प्रो और प्रो XL अच्छे विकल्प होंगे। इस बार तीनों रियर कैमरों में नए सेंसर होंगे। नया 50MP प्राइमरी कैमरा… मिलेगा और लो-लाइट फोटोग्राफी में भी सुधार होगा। ये अगस्त में लॉन्च हो सकता है। आईफोन 18 सीरीज, वीडियोग्राफी में बेस्ट अगर वीडियो शूटिंग पसंद है तो आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स का इंतजार करें। इनमें ‘वैरिएबल अर्पचर’ मिलेगा।… इससे तय कर सकेंगे कि कैमरे में कितनी रोशनी आए व बैकग्राउंड कितना ब्लर हो। यह फोन सितंबर में आएगा। वनप्लस, बड़ी बैटरी के लिए कई विकल्प बैटरी में वनप्लस का नॉर्ड-6 अच्छा है। 41 हजार रुपए में 8 हजार mAh बैटरी मिलती है। 30 हजार रु. तक बजट है तो वनप्लस नॉर्ड-6 सीई भी विकल्प है। यह दोनों फोन लॉन्च हो चुके हें। वीवो वी80, मिड रेंज में ऑलराउंडर फोन मिड-रेंज में विवो वी80 प्रो अच्छा है। इसमें चार कैमरा मिल सकते हैं। स्पेशल सेल्फी कैमरा भी होगा। बैटरी 7200 mAh के पास होगी और कीमत 40 हजार रुपए के आसपास। फोन अभी चीन में लॉन्च हो चुका है। भारत में भी जल्द आएगा। सैमसंग जी फोल्ड 8, फोल्डेबल के लिए मल्टीटास्किंग और बड़े डिस्प्ले पर काम करना पसंद करते हैं, तो सैमसंग गैलेक्सी जी फोल्ड-8 का इंतजार करें। इसमें सभी फ्लैगशिप फीचर्स मिलेंगे। यह जुलाई में लॉन्च होगा। कीमत 1.75 लाख रु. हो सकती है। iQOO 15 अल्ट्रा, परफेक्ट गेमिंग फोन गेमिंग फोन चाहिए तो iQOO 15 अल्ट्रा चुनें। इसमें 24GB तक रैम, 7,400mAh बैटरी है। फिजिकल कूलिंग फैन भी है। कीमत 99,990 रु. से शुरू होगी। चीन में लॉन्च हो चुका है, भारत में जल्द आएगा। आने वाले स्मार्टफोन ट्रेंड्स जानें - 2nm चिपसेट्स का दौर - फोन में ऑन-डिवाइस एआई पहले से तेज और ज्यादा स्मार्ट होंगे। - फोल्ड फोन होंगे ज्यादा चौड़े - साथ ही एपल भी पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च कर सकता है। - बैटरियां भी बड़ी - हालांकि गूगल, एपल और सैमसंग बैटरी क्षमता बढ़ाने में पीछे रह सकते हैं। - कैमरों में आएंगे मूविंग पार्ट्स - बेहतर जूम और कंट्रोल के लिए बड़े बदलाव दिखेंगे। - फोन और महंगे होंगे - रैम की कमी स्मार्टफोन्स की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।
85% एथेनॉल मिक्स वाला E85 फ्यूल दिल्ली में आधिकारिक तौर पर लॉन्च हो गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इंडियन ऑयल (IOC) के पूसा रोड आउटलेट पर दिल्ली के पहले E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन का उद्घाटन किया। खास बात ये है कि यह पेट्रोल से ₹20 प्रति लीटर सस्ता है। इससे न सिर्फ आम लोगों का गाड़ी चलाने का खर्च कम होगा, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता भी घटेगी। दिल्ली में E85 फ्यूल की कीमत ₹82.12 प्रति लीटर तय की गई है। यह दिल्ली में बिक रहे रेगुलर E20 पेट्रोल से पूरे ₹20 कम है। पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को किसी तरह का भ्रम न हो, इसके लिए E85 फ्यूल देने वाली मशीनों (डिस्पेंसर्स) पर एक खास ब्रांडिंग और अलग से साफ दिखने वाला लेबल लगाया जाएगा। इस साल खुलेंगे 500 पंप, 2027 तक 5000 का टारगेट दिल्ली के पूसा रोड पर खुला यह स्टेशन देश का पहला पंप है, लेकिन सरकार का प्लान इसे बहुत बड़े स्तर पर ले जाने का है। शुरुआती फेज में सरकार दिल्ली-NCR और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में करीब 50 से 100 ऐसे E85 फ्यूल स्टेशन स्थापित करेगी। योजना के मुताबिक, इस साल अंत तक देश में ऐसे स्टेशनों का नेटवर्क बढ़ाकर करीब 500 किया जाएगा। वहीं, साल 2027 अंत तक केंद्र सरकार का टारगेट देश के सभी मुख्य शहरों में लगभग 5000 आउटलेट्स शुरू करने का है। सरकार ने हाल ही में E22, E25, E27 और E30 जैसे ज्यादा एथेनॉल मिक्स वाले फ्यूल स्टैंडर्ड्स को भी नोटिफाई किया है। E85 फ्लेक्स फ्यूल में क्या खास है अभी देशभर में फ्यूल स्टेशन पर जो पेट्रोल मिल रहा है वह E20 है, यानी उसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल मिक्स है। इसके उलट, नए E85 फ्यूल में 85% तक एथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल है। सरकार E100 यानी 100% एथेनॉल जैसे फ्लैक्स फ्यूल की ओर बढ़ना चाहती है, ताकि कच्चे तेल के आयात को कम किया जा सके। 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। एथेनॉल को गन्ने के रस, मक्का और सड़े हुए अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है, इसलिए इसकी लागत कम आती है। यही वजह है कि ग्राहकों के लिए यह काफी किफायती साबित होगा, बशर्ते उनके पास इस फ्यूल को सपोर्ट करने वाली गाड़ियां हों। ये फ्यूल पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को भी कम करने में भी मदद करता है। सिर्फ इन चुनिंदा गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा E85 फ्यूल को सामान्य पेट्रोल गाड़ियों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसके लिए गाड़ियों का इंजन खास तौर पर 'फ्लेक्स-फ्यूल' तकनीक पर आधारित होना चाहिए। फिलहाल भारत में अभी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां अवेलेबल नहीं है। क्रूड इम्पोर्ट घटाना है सरकार की प्राथमिकता अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में तेल आयात बिल पिछले साल के $137 बिलियन से घटकर $123 बिलियन रहा है, लेकिन सरकार इसे और कम करना चाहती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ऊर्जा संकट को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन अपनाने पर जोर दिया है। क्या होता है एथेनॉल? एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। -------------- ये भी पढ़ें… इस हफ्ते सोने-चांदी में गिरावट रही: चांदी की कीमत ₹6442 कम होकर ₹2.57 लाख किलो हुई, सोना ₹2225 सस्ता हुआ सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,225 रुपए गिरकर 1.54 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 30 मई को 1.56 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.63 लाख रुपए किलो से गिरकर 2.57 लाख रुपए पर आ गई है। यानी इसकी कीमत 6,442 रुपए कम हुई। पूरी खबर पढ़ें…
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के रूसी हिस्से में हवा का रिसाव (एयर लीक) बढ़ने के बाद नासा ने वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को अपने स्पेसक्राफ्ट में छिपने और संभावित सुरक्षित निकलने (इवैक्युएशन) के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। रूसी चालक दल फिलहाल इस लीक को ठीक करने की कोशिश कर रहा है। क्रू-12 मिशन के यात्रियों को मिला स्पेससूट पहनने का आदेश नासा के अनुसार, स्टेशन पर मौजूद 'क्रू-12' मिशन के 4 अंतरिक्ष यात्रियों को नासा मिशन कंट्रोल से शुक्रवार सुबह 9:04 बजे (ET) यह निर्देश मिला। इनमें दो अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जैक हैथवे और जेसिका मीर, एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री सोफी एडेनोट और एक रूसी अंतरिक्ष यात्री आंद्रेई फेदयेव शामिल हैं। उन्हें स्टेशन से जुड़े 'क्रू ड्रैगन' स्पेसक्राफ्ट के अंदर जाने और अपने स्पेससूट पहनने के लिए कहा गया है, ताकि एयर लीक बढ़ने पर आपातकालीन स्थिति में वहां से तुरंत निकला जा सके। रूस के 'ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल' में हो रहा है रिसाव स्पेस स्टेशन के दो मुख्य संचालक- नासा और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस- पिछले कई महीनों से रूस के 'ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल' में हो रहे छोटे हवा के रिसाव के कारणों और उनके संभावित समाधानों पर चर्चा कर रहे हैं। फुटबॉल के मैदान के आकार की इस पूरी प्रयोगशाला (ISS) में यह मॉड्यूल एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक दिन में लीक डबल हुआ, 1 पाउंड से बढ़कर 2 पाउंड नुकसान हुआ नासा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल के महीनों में यह एयर लीक काफी कम था। लेकिन सोमवार को स्थिति अचानक तब बिगड़ गई, जब लीक होने वाली हवा की मात्रा रोजाना एक पाउंड से बढ़कर दो पाउंड (लगभग दोगुनी) हो गई। इसी वजह से नासा को यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह अलर्ट जारी करना पड़ा। 27 साल के इतिहास में कभी खाली नहीं करना पड़ा ISS स्पेस स्टेशन पर 'सेफ-हेवन' जैसे आदेश बहुत कम दिए जाते हैं। आमतौर पर ऐसा तब होता है जब अंतरिक्ष का कचरा स्टेशन से टकराने वाला हो या हवा के दबाव में कोई बड़ा बदलाव आए। अच्छी बात यह है कि पिछले 27 साल से लगातार इंसानों के घर बने हुए इस स्पेस स्टेशन को आज तक कभी भी आपातकालीन स्थिति में पूरी तरह खाली नहीं करना पड़ा है। इस बार भी दो घंटे बाद स्थिति की समीक्षा कर नासा ने अलर्ट हटा दिया और यात्री वापस स्टेशन के काम में जुट गए। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है? इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाला एक बड़ा अंतरिक्ष यान है। इसमें एस्ट्रोनॉट रहते हैं और माइक्रो ग्रेविटी में एक्सपेरिमेंट करते हैं। यह 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैवल करता है। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर लेता है। 5 स्पेस एजेंसीज ने मिलकर इसे बनाया है। स्टेशन का पहला पीस नवंबर 1998 में लॉन्च किया गया था। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहकर लौटे शुभांशु: स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग कैलिफोर्निया के तट पर हुई, पहली बार कोई भारतीय ISS गया था शुभांशु शुक्ला सहित चार एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहने के बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं। करीब 23 घंटे के सफर के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की आज यानी 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई। इसे स्प्लैशडाउन कहते हैं। चारों एस्ट्रोनॉट एक दिन पहले यानी सोमवार की शाम 4:45 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे। पूरी खबर पढ़ें…
मारुति सुजुकी ने आज (4 जून) भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगन-आर फ्लेक्स-फ्यूल को पेश कर दी है। नई वैगन-आर पूरी तरह से E85 फ्यूल (85% तक एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) से चलने में सक्षम है। फिलहाल गाड़ी सिर्फ फ्लीट ऑपरेटर्स और ओला और उबर जैसे कैब एग्रीगेटर्स के लिए ही अवेलेबल होगी। इसी कारण मारुति ने वैगन-आर फ्लेक्स-फ्यूल की कीमतों का खुलासा नहीं किया है। कार के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन E85 फ्यूल के अनुकूल बनाने के लिए इसमें कई मैकेनिकल अपडेट्स किए गए हैं, जिससे उम्मीद है कि इसकी कीमत पेट्रोल और CNG वर्जन से ज्यादा हो सकती है। 2027 के तक 5000 एथेनॉल पंप लगाने का टारगेट केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी कार को लॉन्च के मौके पर कहा कि, सरकार का लक्ष्य साल 2027 के अंत तक देश में 5000 तक E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन लगाने का है। पुरी ने कहा, “शुरुआत में हमारे पास दिल्ली-NCR और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में लगभग 50 से 100 डिस्पेंसिंग स्टेशन होंगे। इस साल दिसंबर तक इसका विस्तार 500 स्टेशनों तक किया जाएगा।” इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने यह भी भरोसा दिया कि E85 फ्यूल की कीमत मौजूदा E20 पेट्रोल के मुकाबले काफी कम रखी जाएगी। पहली बार सामने आया प्रोडक्शन-स्पेक मॉडल वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल इससे पहले भी कई मौकों पर दिखाई दे चुकी है। यह सबसे पहले साल 2022 में और उसके बाद साल 2024 के भारत मोबिलिटी शो में नजर आई थी। हालांकि, पिछले सभी वर्जन केवल प्रोटोटाइप (टेस्टिंग मॉडल) थे, जबकि आज जिसे पेश किया गया है, वह इसका प्रोडक्शन-स्पेक (उत्पादन के लिए तैयार) मॉडल है। एक्सटीरियर: रेगुलर मॉडल जैसा ही बॉक्सी लुक, 'फ्लेक्स फ्यूल' की बैजिंग नई वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल का ओवरऑल डिजाइन स्टैंडर्ड मॉडल जैसा ही है, लेकिन इसे एक अलग पहचान देने के लिए कुछ कॉस्मेटिक बदलाव किए गए हैं।

